नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब पर फोकस बढ़ा दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने राज्य में अपनी रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने पंजाब में चुनावी कमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपने का फैसला किया है, जो राज्य में संगठन और चुनावी अभियान की निगरानी करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब की बदलती राजनीतिक परिस्थितियां भाजपा के लिए नए अवसर पैदा कर सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने इस बार पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है।
अमित शाह की बैठक पर टिकी निगाहें
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह जल्द ही पंजाब भाजपा नेताओं की एक अहम बैठक कर सकते हैं। इस बैठक में संगठन विस्तार, चुनावी रणनीति और जनसंपर्क अभियानों को लेकर चर्चा होने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर भी भाजपा विशेष अभियान चला सकती है। राज्य में ड्रग्स का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है। ऐसे में पार्टी इसे चुनावी एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बना सकती है।
117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी भाजपा
भाजपा ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव बिना किसी गठबंधन के लड़ने का फैसला किया है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि वह राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
इसके साथ ही शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावनाओं को भी लगभग खारिज माना जा रहा है। भाजपा इस बार अपने संगठन और नेतृत्व के दम पर चुनावी मुकाबले में उतरने की तैयारी कर रही है।
रवनीत सिंह बिट्टू पर भी नजर
पंजाब की राजनीति में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त होने वाला है।
अब तक भाजपा की ओर से उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजे जाने को लेकर कोई संकेत नहीं मिला है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह सक्रिय चुनावी राजनीति में उतर सकते हैं। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें विधानसभा चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
बूथ स्तर तक पहुंचने की रणनीति
भाजपा राज्य में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और घर-घर संपर्क अभियान चलाने पर जोर दे रही है। पार्टी का लक्ष्य उन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना है जहां पिछले चुनाव में उसे अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला था।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व का मानना है कि मजबूत जमीनी नेटवर्क चुनावी मुकाबले में निर्णायक साबित हो सकता है।
बदलते राजनीतिक समीकरणों पर BJP की नजर
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 117 में से 38 विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी। हालांकि बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उसे अभी लंबा सफर तय करना है।
इसी वजह से पार्टी इस बार चुनावी रणनीति को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती और अमित शाह को सीधे जिम्मेदारी सौंपे जाने को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आप में बगावत से भी साधे जा रहे राजनीतिक समीकरण
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं और सांसदों के दल बदलने से पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। भाजपा को उम्मीद है कि विपक्षी दलों के भीतर चल रही उठापटक का उसे चुनावी लाभ मिल सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगामी महीनों में पंजाब की राजनीति किस दिशा में जाती है और भाजपा की यह नई रणनीति चुनावी मैदान में कितना असर दिखा पाती है।
